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    किसानों को सरकार से बड़ी उम्मीद, जानें इस बार के कृषि बजट में क्या होगा खास?

    1 month ago

    देश की आधी से ज्यादा आबादी आज भी किसी न किसी रूप में खेती से जुड़ी हुई है. किसान सिर्फ अन्नदाता नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं.  लेकिन बदलते समय के साथ खेती आसान नहीं रही, कभी मौसम धोखा दे जाता है, तो कभी लागत इतनी बढ़ जाती है कि मुनाफा नाम की चीज दिखाई ही नहीं देती. बीज, खाद, डीजल, कीटनाशक और मजदूरी, हर चीज महंगी होती जा रही है.

    ऐसे समय में किसानों की नजर केंद्रीय बजट 2026 पर टिकी हुई है. यह बजट सिर्फ पैसों की घोषणा नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि आने वाले सालों में किसान मजबूत होंगे या उनकी मुश्किलें और बढ़ेंगी. 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट पेश करेंगी. इससे ठीक पहले पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 ने यह साफ कर दिया है कि सरकार कृषि को लेकर क्या सोच रही है और आगे क्या दिशा हो सकती है. 

    इकोनॉमिक सर्वे में क्या कहा गया खेती को लेकर?

    इकोनॉमिक सर्वे देश की आर्थिक सेहत की रिपोर्ट होती है. इसमें सरकार यह बताती है कि पिछले साल अर्थव्यवस्था कैसी रही और आगे क्या अनुमान हैं. वित्त वर्ष 2026 में GDP ग्रोथ 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है. कृषि और इससे जुड़े क्षेत्रों की औसत वृद्धि दर पिछले 5 सालों में 4.4 प्रतिशत रही.  वहीं पीएम किसान योजना अब तक 11 करोड़ किसानों को फायदा दे चुकी है. कुल 4.09 लाख करोड़ रुपये सीधे किसानों के खाते में भेजे गए. 21वीं किस्त नवंबर 2025 में जारी होगी. अब किसानों को 22वीं किस्त का इंतजार, जो फरवरी में आ सकती है. 

    खेती में तकनीक और पानी पर सरकार का फोकस

    सरकार ने माना है कि अब सिर्फ परंपरागत खेती से काम नहीं चलेगा.  झारखंड में GIS आधारित क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर, डिजिटल रिकॉर्ड, मौसम की जानकारी और भूमि प्रबंधन पर जोर है. यूपी में भू-जल कानून से पानी का बेहतर उपयोग, असम में सिंचाई क्षेत्र में 24  प्रतिशत से ज्यादा बढ़ोतरी, सोलर पंप और सिंचाई योजनाओं को बढ़ावा. 

    इस बार के कृषि बजट में क्या होगा खास?

    1. पीएम-किसान योजना में बढ़ोतरी की उम्मीद - सालाना 6000 की राशि बढ़ाई जा सकती है, भुगतान प्रक्रिया और आसान हो सकती है, ज्यादा किसानों को योजना से जोड़ा जा सकता है. 

    2. फसल बीमा योजना होगी मजबूत - जल्दी मुआवजा मिलने की व्यवस्था, नुकसान का सही आकलन, मौसम से नुकसान झेलने वाले किसानों को राहत मिल सकती है. 

    3. सिंचाई के लिए ज्यादा पैसा - नहरों की मरम्मत, ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई, पानी की बचत और बेहतर फसल हो सकती है. 

    4. नकली बीजों पर सख्त कानून - नया बीज विधेयक लाया जा सकता है. नकली बीज बेचने पर 30 लाख तक जुर्माना, 3 साल तक जेल, किसानों को बुवाई के समय बड़ा नुकसान नहीं होगा. 

    5. कृषि ऋण में राहत - सस्ते और आसान लोन, जिसका लक्ष्य 32.50 लाख करोड़ से आगे बढ़ सकता है. इससे साहूकारों पर निर्भरता कम होगी. 

    6. 100 जिलों में विशेष कृषि योजना - मिट्टी की जांच, स्थानीय फसल योजना और टिकाऊ खेती को बढ़ावा. 

    7. कृषि निर्यात बढ़ाने की तैयारी - बेहतर भंडारण, फूड प्रोसेसिंग को सपोर्ट, किसानों को अच्छे दाम वाले बाजार की तैयारी  हो सकती है. 

    यह भी पढ़ें: पीएम किसान योजना की 22वीं किस्त का इंतजार, इनको नहीं मिलेगा स्कीम का फायदा

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