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    जून के महीने में लगाएं ये 6 बंपर मुनाफा देने वाली सब्जियां, कम लागत में होगी रिकॉर्डतोड़ कमाई

    1 day ago

    Vegetables Farming Tips:जून की चिलचिलाती गर्मी और मानसून की दस्तक के बीच अगर आप सही फसलों का चुनाव कर लें तो खेती से रिकॉर्डतोड़ कमाई कर सकते हैं. अक्सर इस महीने में तेज धूप के कारण कई फसलें झुलस जाती हैं, लेकिन कुछ ऐसी खास सब्जियां हैं जो इस मौसम को बहुत आसानी से झेल लेती हैं.

    इस समय मार्केट में हरी सब्जियों की आवक कम होने लगती है जिससे इनके दाम आसमान छूने लगते हैं. अगर किसान भाई जून के महीने में इन छह चुनिंदा सब्जियों की बुवाई या रोपाई कर लेते हैं. तो बेहद कम लागत और कम समय में उन्हें बंपर मुनाफा मिलना तय है.

    बैंगन और टमाटर 

    इस सीजन में आप बैंगन और टमाटर की खेती शुरू करके मार्केट में तगड़ा मुनाफा कूट सकते हैं. जून का महीना इन दोनों सब्जियों की नर्सरी तैयार करने या खेतों में रोपाई करने के लिए एकदम परफेक्ट माना जाता है.

    बैंगन की पूसा पर्पल लॉन्ग या हाइब्रिड किस्में और टमाटर की स्वर्ण नवीन जैसी वैरायटी इस मौसम के लिए बेस्ट हैं. अच्छी जल निकासी वाले खेतों में अगर आप इनकी रोपाई सही दूरी पर करते हैं. तो मानसून आते-आते पौधे तेजी से बढ़ते हैं. जब सावन के महीने में बाजार में इन दोनों सब्जियों की डिमांड सबसे ज्यादा होती है. तब आपकी फसल आपको तगड़ा रिटर्न देगी.

    यह भी पढ़ें: बारिश के सीजन में खाली पड़ी जमीन पर करें इस फसल की खेती, कुछ ही दिन में होगी तगड़ी कमाई

    भिंडी और लोबिया 

    कम पानी और तेज गर्मी में सरवाइव करने के लिए भिंडी और लोबिया सबसे शानदार और कम लागत वाली फसलें हैं. जून के पहले या दूसरे हफ्ते में इनकी सीधी बुवाई खेतों में की जा सकती है. भिंडी की उन्नत किस्में जैसे परभनी क्रांति या अर्क अनामिका इस मौसम में बहुत तेजी से फल देती हैं और इनमें बीमारियां भी कम लगती हैं.

    वहीं दूसरी ओर लोबिया एक दलहनी फसल है जो मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को बढ़ाने के साथ-साथ लगातार टूटती रहती है. इन दोनों सब्जियों की मार्केट में डेली डिमांड रहती है. जिससे किसानों को रोज कैश मिलता रहता है.

    करेला और लौकी 

    मानसून के सीजन में हरी बेल कद्दूवर्गीय सब्जियों जैसे करेला और लौकी की मांग हर घर में बहुत ज्यादा बढ़ जाती है. जून के महीने में मचान विधि का इस्तेमाल करके अगर आप इनकी बुवाई करते हैं, तो फल सड़ने का खतरा एकदम खत्म हो जाता है.

    करेले की पूसा दो मौसमी और लौकी की पूसा नवीन जैसी किस्में इस समय लगाने से पौधों में बंपर फ्लावरिंग होती है. चूंकि बारिश के पानी से इनकी बेलें बहुत तेजी से फैलती है इसलिए महज 50 से 60 दिनों के भीतर आपको छप्परफाड़ पैदावार मिलने लगती है जो आपकी जेब को फुल कर देगी.

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